पारम्परिक सिंचाई पद्धतियों की सीमाओं और मुश्किलों को पीछे छोड़कर आधुनिक ड्रिप सिस्टम और उन्नत बागवानी को अपनाना हरदा के एक कृषक के लिए वरदान साबित हुआ है। यह सफलता की कहानी विकास खण्ड हरदा अंतर्गत ग्राम झाड़पा निवासी श्री विनोद गुर्जर पिता श्री रविशंकर की है, जिन्होंने आधुनिक कृषि को अपनाकर क्षेत्र के अन्य किसानों के सामने एक नई मिसाल पेश की है।
पारम्परिक सिंचाई से खड़ी थीं कई चुनौतियाँ
कृषक विनोद गुर्जर के पास कुल 2 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि है। वे पहले अपने खेतों में पारम्परिक सिंचाई प्रणाली अपनाते थे, जो उनके लिए एक बड़ी समस्या बन चुकी थी। इस पुरानी पद्धति के कारण पानी की भारी बर्बादी होती थी और मोटर पंप ज्यादा चलने से बिजली की खपत व खर्च बहुत अधिक रहता था।
खास बातें
- कृषक विनोद गुर्जर के पास कुल 2 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि है।
- परेशानियों से निजात पाने के लिए विनोद गुर्जर ने उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया।
- विभाग के विशेषज्ञों ने उन्हें संरक्षित और आधुनिक बागवानी खेती अपनाने की सलाह दी।
इसके अलावा, अनियंत्रित पानी फैलने से खेतों में खरपतवार (अवांछित घास) बड़े पैमाने पर उग आती थी, जिससे फसल को भारी नुकसान पहुँचता था। इन सभी समस्याओं के चलते खेती से मनमुताबिक लाभ नहीं मिल पा रहा था। परेशानियों से निजात पाने के लिए विनोद गुर्जर ने उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। विभाग के विशेषज्ञों ने उन्हें संरक्षित और आधुनिक बागवानी खेती अपनाने की सलाह दी।
विभाग से मिले मार्गदर्शन के बाद उन्होंने एक बड़ा कदम उठाया और अपने खेत के एक हेक्टेयर रकबे (क्षेत्रफल) में आम एवं अमरूद के पौधों का रोपण कर दिया। इसके साथ ही विनोद ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत अपने खेत में सिंचाई के लिए आधुनिक ड्रिप सिंचाई संयंत्र स्थापित करवाया। ड्रिप सिंचाई पद्धति को अपनाने से विनोद जी के खेत की सूरत ही बदल गई।
इस प्रणाली के तहत पानी सीधे पौधों की जड़ों तक बूंद-बूंद करके पहुंचता है, जिससे वाष्पीकरण और बहने से होने वाले पानी के नुकसान में लगभग 50 से 60 प्रतिशत की कमी आई है। पानी की बचत के साथ-साथ अब समय और श्रम (मजदूरी) की भी भारी बचत हो रही है। सबसे बड़ी राहत खरपतवार में आई कमी से मिली है, जिसके कारण फसलों की देखरेख की लागत घट गई है।
विनोद गुर्जर बताते हैं कि पारम्परिक फसलों की तुलना में इस नई तकनीकी बागवानी से अब उन्हें बहुत अधिक लाभ प्राप्त होने की पूरी संभावना है। खेत में उगने वाली फसल उनकी नई खुशहाली का आधार बन चुकी है। इस समय पर मिली तकनीकी जानकारी और बेहतरीन मार्गदर्शन के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का सहृदय आभार प्रकट किया है।


