धान की फसल में इन दिनों माहू एवं लाल रोग जैसी समस्याओं से किसान परेशान हैं। एक ओर जहां रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग करने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने की बात किसानों द्वारा कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर कम लागत में तैयार किए जाने वाले प्राकृतिक कृषि उत्पाद किसानों के लिए एक वैकल्पिक उपाय के रूप में सामने आ रहे हैं।

किसानों द्वारा अग्निअस्त्र, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, दशपर्णी अर्क एवं जीवामृत जैसे प्राकृतिक कृषि उत्पादों का उपयोग धान की फसल में किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि इनके प्रयोग से फसल में कीट प्रकोप को नियंत्रित करने में सहायता मिल रही है। प्राकृतिक कृषि पद्धति के इन उत्पादों को स्थानीय स्तर पर कम लागत में तैयार किया जा सकता है, जिससे किसानों को महंगे रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलता है।

खास बातें

  • यहां तैयार होने वाले उत्पाद किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार न्यूनतम मूल्य पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
  • किसान इन उत्पादों का उपयोग अपनी फसलों में कर रहे हैं और इनके प्रयोग के अनुभव भी साझा कर रहे हैं।
  • बीआरसी में तैयार किए जा रहे जैविक उत्पाद किसानों को न्यूनतम मूल्य पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे अपनी खरीफ फसलों में इनका उपयोग कर सकें।

जानपुर बीआरसी सेंटर में तैयार हो रहे जैविक उत्पाद

कृषि विभाग की आत्मा समिति, जिला बालाघाट के अंतर्गत विकासखंड बिरसा के जानपुर जैविक संसाधन केंद्र (बीआरसी) में विभिन्न प्राकृतिक एवं जैविक कृषि उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। यहां तैयार होने वाले उत्पाद किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार न्यूनतम मूल्य पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

बीआरसी के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न आयामों की जानकारी देने के साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से जैविक उत्पाद तैयार करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य खेती की लागत को कम करने के साथ किसानों को प्राकृतिक कृषि पद्धतियों से जोड़ना है। जानपुर बीआरसी की संचालक बिंदुलता टांडिया के अनुसार प्राकृतिक कृषि उत्पादों के प्रति क्षेत्र के किसानों में रुचि बढ़ रही है।

किसान इन उत्पादों का उपयोग अपनी फसलों में कर रहे हैं और इनके प्रयोग के अनुभव भी साझा कर रहे हैं। बीआरसी में तैयार किए जा रहे जैविक उत्पाद किसानों को न्यूनतम मूल्य पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे अपनी खरीफ फसलों में इनका उपयोग कर सकें।

कृषि विभाग एवं बीआरसी के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक कृषि पद्धतियों के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी देते हुए फसल में कीट-व्याधि प्रबंधन के लिए उचित उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।